आरती जीण माता
ॐ जय श्री जीण मैय्या, बोलो जय श्री जीण मैय्या।
सच्चे मन से सुमिरे, सब दुःख दूर भया।। टेर।।
ऊँचे पर्वत मंदिर, शोभा अति भारी।
दिखत रूप मनोहर, असुरन भयकारी ।। १।।
महा श्रृंगार सुहावन, ऊपर छत्र फिरे।
सिंह की सवारी सोहे, कर मे खड्ग धरे ।। २।।
बाजत नौबत द्वारे, अरु मृदंग डमरू।
चौसठ जोगन नाचत, नृत्य करत भैरूँ ।। ३।।
बड़े - बड़े बलशाली, तेरा ध्यान धरें।
ऋषि मुनि, नर देवा, चरणों आन परें ।। ४।।
जीण माता की आरती, जो कोई जन गावे।
कहत रूड़मल सेवक, सुख सम्पति पावे ।। ५।।
ॐ जय श्री जीण मैय्या, बोलो जय श्री जीण मैय्या।